फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर – फ्यूचर्स (Futures) और ऑप्शन्स (Options) दो तरह के वित्तीय उपकरण होते हैं, जो बाजार में विभिन्न प्रकार की वित्तीय विचारों और विनिमय की जरूरियतों को पूरा करने में मदद करते हैं। इन दोनों के बीच मुख्य अंतर है कि फ्यूचर्स एक संविदान के तहत विमुक्त होते हैं, जबकि ऑप्शन्स विमुक्ति का विचार करने के लिए एक विशेष कीमत (मूल्य) की आवश्यकता होती है

फ्यूचर्स (Futures) – फ्यूचर्स एक वित्तीय समझौता होता है जिसमें दो पक्षीय समझौता तय करते हैं कि वे एक निश्चित मूल्य पर किसी वित्तीय संपत्ति को एक निश्चित तिथि पर खरीदेंगे या बेचेंगे। फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स को विशेष तारीख पर विचालित किया जाता है

और यह समझौता निष्पक्ष होता है, यानी कि इसमें कोई नेगोशिएशन नहीं होती है। फ्यूचर्स वित्तीय उपकरण होते हैं जिनका मूल्य विभिन्न वित्तीय संपत्तियों के बारे में निष्कर्षित किया जाता है, जैसे कि स्टॉक्स, कमोडिटीज़, और सांदर्भिक मुद्राएँ।

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ऑप्शन्स (Options) – ऑप्शन्स भी एक वित्तीय समझौता होता है, लेकिन इसमें एक पक्ष एक अन्य पक्ष से वित्तीय संपत्ति को एक निश्चित मूल्य पर खरीदने या बेचने का अधिकार रखता है, लेकिन इसमें एक अवधि का मर्जिन होता है।

यानी, ऑप्शन्स विमुक्ति के अधिकार की मांग करने के लिए एक प्रीमियम चुकाना होता है, जिसे विमुक्ति प्रीमियम कहा जाता है। ऑप्शन्स वित्तीय उपकरण होते हैं जो बाजार में किसी विशेष संपत्ति के मूल्य के उतार-चढ़ाव का उपयोग करके विमुक्ति के अधिकार को ट्रेड करने के लिए उपयोग किया जाता है, और इसके दो प्रमुख प्रकार होते हैं: कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन।

अब हम इन दोनों वित्तीय उपकरणों के मुख्य अंतर को और विस्तार से समझते हैं

मूल्य निर्धारण (Price Determination) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स का मूल्य बाजार परिस्थितियों और आपसी रुझानों के आधार पर निर्धारित होता है। फ्यूचर्स कंट्रैक्ट के मूल्य में विभिन्न घटकों का योगदान होता है, जैसे कि संपत्ति की मूल्य, ब्याज दरें, और डिविडेंड योग्यता।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स की मूल्य विमुक्ति प्रीमियम के आधार पर निर्धारित होती है, जिसमें विभिन्न कारक शामिल होते हैं, जैसे कि विमुक्ति की मूल्य, संपत्ति की मूल्य, संचयन दरें, और विमुक्ति की समय सीमा।

विमुक्ति (Flexibility)

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स विमुक्ति का प्रावधान नहीं करते हैं, यानी कि व्यापारकों को कंट्रैक्ट की समय सीमा तक विमुक्ति को चुकाना होता है, चाहे उन्हें समय सीमा तक चुकाने की आवश्यकता हो या न हो।

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ऑप्शन्स – ऑप्शन्स विमुक्ति के अधिकार की मांग करने के बिना विमुक्ति का इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं। विमुक्ति प्रीमियम चुकाने के बजाय, विमुक्ति प्राप्त करने के अधिकार की खरीद की जाती है, और इसका उपयोग केवल यदि व्यापारक इसकी आवश्यकता महसूस करते हैं किया जाता है।

लाभ की संरचना (Profit Structure) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स का प्रॉफिट यह होता है कि व्यापारकों को संपत्ति के मूल्य के उतार-चढ़ाव से लाभ होता है, यानी यदि मूल्य ऊपर जाता है तो विमुक्ति की मांग करने पर लाभ होता है, और यदि मूल्य नीचे जाता है तो नुकसान होता है।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स का प्रॉफिट यह होता है कि व्यापारकों को विमुक्ति प्रीमियम के चुकावने के बाद विमुक्ति की खरीद करने के अधिकार के साथ संपत्ति के मूल्य के उतार-चढ़ाव से लाभ होता है, यानी यदि मूल्य ऊपर जाता है तो व्यापारकों को लाभ होता है, और यदि मूल्य नीचे जाता है तो व्यापारकों को केवल प्रीमियम की चुकावनी की आवश्यकता होती है, और वे नुकसान से बच सकते हैं।

जोखिम (Risk) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स –  फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स जोखिम पूर्ण होते हैं, और व्यापारकों को संपत्ति के मूल्य के ऊपर जाने या नीचे जाने का सामर्थ्य होता है। इसका मतलब है कि व्यापारकों को पूरा बैकग्राउंड चेक करना होता है और मूल्य के उतार-चढ़ाव को सहने के लिए उन्हें ध्यानपूर्वक होना चाहिए।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स जोखिम कम करते हैं, क्योंकि व्यापारकों को सिर्फ प्रीमियम की चुकावनी करनी होती है, जो उन्होंने ऑप्शन खरीदने के लिए चुकाया होता है। यदि मूल्य उनके पक्ष में नहीं जाता, तो वे केवल प्रीमियम खोते हैं, लेकिन कोई और जोखिम नहीं होता।

समय की प्रावधान (Time Horizon)

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स का अवधि निश्चित होता है और इसे आधार तिथि पर समाप्त किया जाता है। इसका मतलब है कि व्यापारकों को फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स को निष्पक्षता से विचालित करना होता है, चाहे उन्हें विमुक्ति की जरूरत हो या न हो।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स का अवधि विमुक्ति के अधिकार के प्राप्ति की तिथि तक होता है, और इसे व्यापारकों की विशेष आवश्यकताओं के आधार पर चुना जा सकता है। विमुक्ति प्रीमियम के चुकावने के बाद, व्यापारकों को विमुक्ति के अधिकार का उपयोग केवल उनकी आवश्यकता के हिसाब से करना होता है।

स्टॉक का मालिकी (Ownership of the Asset) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स व्यापारकों को संपत्ति के मालिक नहीं बनाते हैं, केवल उन्हें संपत्ति के मूल्य के उतार-चढ़ाव से लाभ देते हैं।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स व्यापारकों को संपत्ति के मालिक नहीं बनाते हैं, लेकिन विमुक्ति प्रीमियम के चुकावने के बाद उन्हें संपत्ति के मालिक के अधिकार का उपयोग करने की अनुमति देते हैं, यदि व्यापारक चाहते हैं।

लागत (Cost) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स को खरीदने के लिए शुल्क के अलावा कोई अतिरिक्त लागत नहीं होती है।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स को खरीदने के लिए विमुक्ति प्रीमियम चुकाना होता है, जो व्यापारकों को विमुक्ति के अधिकार का उपयोग करने की अनुमति देता है।

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वित्तीय संपत्तियों के प्रकार (Types of Financial Assets) – फ्यूचर और ऑप्शन में अंतर

फ्यूचर्स – फ्यूचर्स कंट्रैक्ट्स का उपयोग विभिन्न प्रकार की संपत्तियों के लिए किया जा सकता है, जैसे कि स्टॉक्स, कमोडिटीज़, और सांदर्भिक मुद्राएँ।

ऑप्शन्स – ऑप्शन्स भी विभिन्न प्रकार की संपत्तियों के लिए उपलब्ध होते हैं, लेकिन ये विमुक्ति के अधिकार के साथ खरीदे जाते हैं, और उनका उपयोग विमुक्ति की मूल्य के उतार-चढ़ाव को निगरान करने के लिए किया जाता है।

इन विवरणों के माध्यम से, हमने फ्यूचर्स और ऑप्शन्स के मुख्य अंतर को समझ लिया है। यह दोनों वित्तीय उपकरण बाजार में विभिन्न प्रकार के निवेशकों और व्यापारकों के लिए उपयोगी होते हैं, और इन्हें समझने और सही तरीके से उपयोग करने के लिए जरूरी है कि व्यक्ति कुशलता और जागरूकता हासिल करें।

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